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पूना पैक्ट की कहानी

गोलमेज सम्मेलन मे,
बाबा की मेहनत रंग लाई ।
अपने बुध्दिबल से बाबा ने .
कम्युनल एवार्ड की उपलब्धी पाई ॥
अँग्रेजो ने जब तुमको दे दिया<
पृथक निर्वाचन अधिकार तुम्हारा ।
तब गाँधी जी ने छीनने का लिया,
अनशन हथियार का सहारा ॥
गांधी के न प्राण बचाते,
गर बाबा बनकर दानी ।
तो आज तुम्हारी मूलनिवासियोँ,
होती कुछ और कहानी ॥

सच पूछो खटक रहा है,
वह पूना पैक्ट हत्यारा ।
जिसने शोषित कौमो को,
जीवित छोड़ा ना मारा ॥
तुम अब तक पनप न पाये,
उस पूना पैक्ट के मारे ।
निर्दय पूना पैक्ट ने ,
सचमूच छीने अधिकार तुम्हारे ॥
गर पूना पैक्ट पूना का,
कर जाता न इतनी हानि ।
तो आज तुम्हारी मूलनिवासियो,
होती कुछ और कहानी ॥

तब शुभ चिंतक हमारे,
यहाँ नेता बनकर आते ।
गुलाम पार्टियो के नेता,
संसद मेँ न चुनकर जाते ॥
दूसरा वोट दिखाता कमाल,
जनरल नेता नित आपके ढोक लगाते ।
शासक बन हित करते शोषित जनो के,
सामान्य नेताओ के नकेल लगाते ॥

लड़ते वे तुम्हारे सुख को,
अपना ही ना पेट बढ़ाते ।
अपनो का गला घोटकर,
अपने न गीत गैर के गाते ॥
असली नकली चेहरों की,
तब तुम रखते निगरानी ।
तो आज तुम्हारी मूलनिवासियो,
होती कुछ और कहानी ॥

जो हुआ सो उसको छोड़ो,
पर अब तो आंखे खोलो ।
अब तो करो विचार ,
सोच समझकर सीधी भाषा बोलो ॥
बाबा के पद चिन्हों पर,
गर पद न पढ़ा तुम्हारा ।
तो आप न चुका सकोगे,
बाबा से जो लिया उधारा ॥

पुना पैक्ट के वादे को,
भूले विपक्ष को याद दिलाओ ।
करे ना शर्त पूरी तो पृथक निर्वाचन,
दो वोट अधिकार पुनः ध्यान मे लाओ ॥
इस पूना पैक्ट की है,
बड़ी अजब अविश्वास की जुबानी ।
तो आज तुम्हारी मूलनिवासियो,
होती कुछ और कहानी ॥

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