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प्रधानमंत्री के चहरे से उतरा नकाव चड़ी कोयले की कालिख

भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक का पद संवैधानिक है। इसकी सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति जैसी गरिमा है। लिहाजा, उसने कोल ब्लॉक आवंटन से जुड़ी जो ऑडिट रिपोर्ट दी है और उसमें यदि तथ्यात्मक आशंकाएं जताई हैं तो उनके अर्थ गंभीर मायनों के पर्याय हैं। सरकार केवल यह जुमला छोड़कर बरी नहीं हो सकती कि नीति पारदर्शी थी और उसमें कोई अनिमियता या गलती नहीं हुई है। वैसे नीतियां तो सभी पारदर्शी और जन कल्याणकारी होती हैं, लेकिन निजी स्वार्थपूर्ति के लिए उन पर अपारदर्शिता का मुलम्मा चढ़ाकर ही भष्टाचार के द्वार खोले जाते हैं।

अपारदर्शिता और अनीति का यही खेल कोल ब्लॉक के आवंटन में बरता गया और पलक झपकते ही चुनिंदा निजी कंपनियों को 1.86 लाख करोड़ रुपये का लाभ पहुंचा दिया। कोयले की इस दलाली में काले हाथ किसी और मंत्री-संतरी के नहीं, बल्कि उस प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के हुए हैं, जो ईमानदारी का कथित चोला ओढ़े हुए हैं।

कोल ब्लॉक आवंटन में गड़बडि़यां हैं, इसकी सुगबुगाहट तो बहुत पहले शुरू हो गई थी। बाद में टीम अन्ना ने मनमोहन सिंह समेत 15 कैबिनेट मंत्रियों पर दस्तावेजी साक्ष्य पेश करके भ्रष्टाचार के जो अरोप लगाए थे, उनसे भी तय हो गया था कि केंद्र सरकार का यह मंत्रिमंडल अली बाबा चालीस चोरों का समूह है। टीम अन्ना ने तब भी यह आरोप सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और कैग की रिपोर्ट के आधार पर ही लगाए थे, लेकिन तब टीम अन्ना के पास कैग की रिपोर्ट के अधूरे दस्तावेज अनाधिकृत तौर से आए थे। इसलिए तब सरकार ने प्रधानमंत्री का बचाव इस बिना पर कर लिया था कि कैग की जिस रिपोर्ट का हवाला टीम अन्ना दे रही है, वह अभी तक संसद में पेश ही नहीं हुई है।

इसलिए यह सब आरोप सरकार और प्रधानमंत्री को बदनाम करने के लिए गढ़े हुए हैं। किंतु अब कैग ने परफॉर्मेस ऑडिट ऑफ कोल ब्लॉक एलोकेशंस नामक इस रिपोर्ट को संसद में पेश कर दिया है। इसके पेश होते ही कोयला घोटाला अधिकृत रूप से देश के सामने आ गया। सरकार अब मुंह चुराते हुए इसे झुठलाने के उपक्रम में लगी है। मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री रहते हुए देशभर में भू-संपदा के रूप में फैले कोयले के ये टुकड़े बिना किसी नीलामी के पूंजीपातियों को बांट दिए गए, जबकि कोयला सचिव ने नोटशीट पर बाकायदा टीप दर्ज की थी कि प्रतिस्पर्धी बोलियों के बिना महज आवेदन के आधार पर खदानों का आवंटन किया गया तो इससे सरकारी खजाने को बड़ी मात्रा में नुकसान होगा। हुआ भी यही। अब कैग ने तय कर दिया कि देश में अब तक का यह सबसे बड़ा घोटाला है। इससे पहले मार्च 2012 में कैग की ड्रॉफ्ट रिपोर्ट सामने आई थी। उसमें 10.71 लाख करोड़ रुपय के नुकसान का आकलन किया गया था। उस समय सरकार में इसे प्रारूप पत्र कहकर टाल दिया था। अब वित्तमंत्री पी चिदंबरम की ओर से संसद में सार्वजानिक की गई इस रिपोर्ट के बारे में कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जयसवाल दलील दे रहे हंै कि कैग के आकलन का तरीका ही गलत है।

हम संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) में अपना पक्ष रखेंगे। सरकार ऐसा सिर्फ इसलिए कह रही है, जिससे संसद के चालू सत्र में हंगामे से बचाया जाए। 1973 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कोयला खदानों का राष्ट्रीयकरण करके खादान मजदूरों का हित साधने और समावेशी विकास का उत्कृष्ट नजरिया पेश करते हुए सार्वजानिक क्षेत्र की कंपनी कोल इंडिया को कोयला उत्खनन और वितरण की जिम्मेदारी सौंप दी थी। कोल इंडिया ही रेलवे ऊर्जा और इस्पात उद्योगों की मांग की आपूर्ति करती थी। 1993 तक यही स्थिति बहाल रही, लेकिन उसी साल से कोयला उत्खनन पर कोल इंडिया का वर्चस्व खत्म करने और इसे नए नियमों की प्रक्रिया में बांधकर बाजार के हवाले कर देने की कार्रवाई शुरू हो गई।

उस समय केंद्र में वित्तमंत्री मनमोहन सिंह थे। लिहाजा, आर्थिक उदारवादी नीतियों को परवान चढ़ाने के नजरिये से पहले एक मंत्रिमंडलीय आंतरिक मूल्यांकन समिति का गठन किया गया। इसकी सिफारिश पर कोयला मंत्रालय निजी कंपनियों को कोल ब्लॉक देने लगा, लेकिन बाजार में आवारा पूंजी का प्रवाह नहीं बना तो मनमोहन सिंह ने धन की कमी के बहाने कोल इंडिया को निर्देश दिए कि वे कोल ब्लॉक के आवेदनों पर समिति के पास भेजे बिना ही ठेके पर देने की नीति अपना ले। नतीजतन कायदे-कानूनों की अवहेलना कर कोल ब्लॉक निजी हाथों को सौंपे जाने लगे। इसी की नतीजा है कोल ब्लॉक के आवंटन में यह घोटाला। (लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं)[Jagran]

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3 comments

  1. mai sharafat ali,mai pure hoos aws mai ye lekh eaha hoo. ki pm.india ka is hadt tak gir sakta hai mai ne ye sochabhi nahi tha ,mai chata hoo. kipm ko phashe do,azmal kashab atankvadi hai to kya india ke neta pm congres bjp ,ye bhi atakvadi hai eneh saja kaun dega mere 09889272185

  2. agar lokpal ajaye to pm soniya gandhi rahul gandhi ,aur anye chamche jail mai jaye gee,aur sc,kaurt ke justic bhi chaour hai,

  3. cbi ,ib sabhi kendra sarkar ke gulam hai ye soniya ke isare par kam karti hai
    ye log kise ko bhi pasha dete hai aur agare koi atankvadi enehai nahi milta to ye loge india ke muslim ko terest bata kar unhe saja dete hai ye kab tak calega ab bas bhi bhut hoogya,indian yuv sakti se gujarish hai ki bo age hye

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