विकास का रास्ता (कांग्रेस की महंगाई ही विकास का रास्ता)
Dec 9th, 2009 | By admin | Category: Know About The BSPउत्तर प्रदेश के दौरे पर गए राहुल गांधी इस कारण ज्यादा चर्चा में हैं कि उनका हेलीकॉप्टर कथित तौर पर अंधेरे में उतरा, लेकिन उनके इस बयान पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है कि राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने पर ही विकास का रास्ता खुलेगा। चूंकि उन्होंने इसी तरह के बयान अन्य गैर कांग्रेस शासित राज्यों में भी दिए हैं इसलिए यह आभास होना स्वाभाविक है कि वह कांग्रेस शासन को विकास की गारंटी सिद्ध कर रहे हैं। केंद्र में सत्तारूढ़ दल को अपनी क्षमता का बखान करने की पूरी स्वतंत्रता है, लेकिन उसकी ओर से किसी गैर कांग्रेस शासित राज्य में ऐसा संदेश देना ठीक नहीं कि सिर्फ उसके सत्ता में आने पर ही विकास होगा, खासकर गैर चुनावी मौसम में। यदि एक क्षण के लिए यह मान लिया जाए कि कांग्रेस का शासन विकास की गारंटी है तो देश ऐसे किसी कांग्रेस शासित राज्य से परिचित होना चाहेगा जहां विकास की गंगा बह रही हो। क्या आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा, राजस्थान आदि राज्य विकास के अद्भुत प्रतिमान रच रहे हैं? क्या यह किसी से छिपा है कि इस राज्य के कुछ हिस्से शर्मसार करने वाली निर्धनता से दो-चार हैं? यह सही नहीं कि गैर कांग्रेस शासित राज्यों के मुकाबले कांग्रेस शासित राज्य कहीं अधिक खुशहाल और विकास एवं जनकल्याण के प्रति समर्पित हैं। यह निराशाजनक है कि राहुल गांधी प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से यह संदेश दे रहे हैं कि राज्यों में कांग्रेस की सरकार होगी तो केंद्रीय सत्ता उनके प्रति उदारता दिखाएगी। केंद्र में सत्तारूढ़ दल को यह शोभा नहीं देता कि वह यह प्रतीति कराए कि उसके अपने दल वाली राज्य सरकारें कहीं अधिक सुविधाएं अथवा रियायत पाएंगी।
ऐसा लगता है कि कांग्रेस उस पुरानी मानसिकता का परित्याग नहीं कर पा रही जिसके तहत एक समय उसके नेतृत्व वाले केंद्रीय शासन को अन्य दलों द्वारा शासित राज्य फूटी आंख नहीं सुहाते थे। इसी मानसिकता के कारण राष्ट्रपति शासन के दुरुपयोग का रिकार्ड उसके नाम दर्ज हुआ। भले ही केंद्र सरकार चाहे जैसे दावे करे, गैर कांग्रेस शासित राज्यों की यह शिकायत दूर होने का नाम नहीं ले रही कि केंद्रीय सत्ता उनकी समस्याओं के समाधान के प्रति सजग-सचेत नहीं। यह भारतीय राजनीति की अपरिपक्वता का ही परिचायक है कि केंद्र-राज्य में सत्तारूढ़ दलों के बीच राजनीतिक मतभेद उभरते ही सरकारों के स्तर पर भी पाले खिंच जाते हैं और विकास के मामले में राजनीति होने लगती है। अब तो राजनीतिक लाभ-हानि के फेर में विकास योजनाओं की अनदेखी करने से भी नहीं चूका जाता। नि:संदेह कई बार ऐसा राज्यों की ओर से भी होता है, लेकिन मौका पड़ने पर केंद्रीय शासन भी असहयोग भाव दिखाने से खुद को रोक नहीं पाता। जब ऐसा होता है तो दुष्परिणाम राज्य विशेष की जनता को भोगना पड़ता है। राहुल गांधी अपने बयानों के जरिये यह भी रेखांकित कर रहे हैं कि केंद्र सरकार न केवल विकास, बल्कि निर्धन तबकों और युवाओं के कल्याण के लिए भी प्रतिबद्ध है, लेकिन महंगाई से कराह रही आम जनता के प्रति जैसी संवेदनहीनता दिखाई जा रही है उससे तो किसी के लिए भी यह कहना कठिन है कि केंद्रीय शासन को आम आदमी की तनिक भी चिंता है।
Reference : jagran