कांग्रेस की अभद्र, विधि विरुद्ध, दलित और महिलाओं के विरुद्ध अशालीन राजनीति
Jul 17th, 2009 | By admin | Category: Know About The BSPउत्तार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी की मुख्यमंत्री मायावती के संदर्भ में अभद्र और आपत्तिाजनक टिप्पणी के बाद राजनीतिक रूप से संवेदनशील इस राज्य में उथलपुथल मचनी ही थी। आम धारणा है कि हमारे राजनेता आम तौर पर चुनावों के अवसर पर सही-गलत भाषा का भेद भूल जाते हैं, लेकिन लगता है कि अब उन्होंने यह समय सीमा भी खत्म कर दी है। दुष्कर्म पीड़ित दलित महिलाओं को मुआवजा देने की नीति से असहमत होने का यह मतलब नहीं कि सीधे शासन प्रमुख के खिलाफ आपत्तिाजनक टिप्पणी करने में संकोच न किया जाए। यह दुखद है कि रीता बहुगुणा जोशी ने ठीक ऐसा ही किया। आखिर कोई राजनेता इस तरह बिना सोचे-विचारे कैसे बोल सकता है? यह ठीक है कि उन्होंने अपने अशालीन वक्तव्य पर माफी मांग ली, लेकिन ऐसा करते हुए उन्होंने जिस तरह यह भी जोड़ा कि उनके कथन को तोड़-मरोड़कर और संदर्भ से काट कर इस्तेमाल किया गया उससे तो यही लगता है कि वह अपनी गलती मीडिया पर मढ़ने का इरादा रखती हैं। आखिर यह क्या बात हुई? उन्हें बिना किसी किंतु-परंतु के माफी मांगनी चाहिए थी, क्योंकि राजनीति में ऐसी भाषा के लिए कोई स्थान नहीं हो सकता। यह ठीक है कि कांग्रेस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए रीता बहुगुणा जोशी के बयान से किनारा कर लिया, लेकिन यह जानना कठिन है कि उत्तार प्रदेश में कांग्रेसजन धरना-प्रदर्शन कर गिरफ्तारी क्यों दे रहे हैं? क्या इसलिए कि राज्य सरकार ने रीता बहुगुणा जोशी के खिलाफ दलित एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेज दिया या फिर इसलिए कि बसपा नेताओं ने उनका घर जला डाला? यह स्पष्ट किया जाना आवश्यक है, क्योंकि उत्तार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के विरुद्ध दलित एक्ट के अंतर्गत कार्रवाई उचित है या नहीं, यह तय करना अदालत का काम है-न कि राजनीतिक दल विशेष का। कांग्रेसजन इस पर तो सड़कों पर उतर सकते हैं कि कथित बसपा नेताओं ने उनकी नेता का घर फूंक डाला और पुलिस देखती रही, लेकिन किसी कार्रवाई पर शोर मचाने का तब तक कोई मतलब नहीं जब तक विधि के शासन के दुरुपयोग की बात प्रमाणित न हो। बेहतर हो कि कांग्रेस जन पहले यह साबित करें कि रीता जोशी के खिलाफ की गई कार्रवाई विधि विरुद्ध है? नि:संदेह यह अपेक्षा की जानी चाहिए थी कि रीता जोशी की ओर से अपनी ओछी टिप्पणी के लिए क्षमा मांग लेने पर उन्हें माफ कर दिया जाना चाहिए था, लेकिन क्या कांग्रेस-बसपा के दिन-प्रतिदिन कटु होते संबंधों को देखते हुए इस अपेक्षा के पूरे होने की कोई गुंजाइश शेष थी?
रीता बहुगुणा जोशी की अभद्र टिप्पणी के बाद के घटनाक्रम ने इसलिए देश का ध्यान अपनी ओर खींचा, क्योंकि इसके जरिए कांग्रेस और बसपा के वैमनस्यतापूर्ण संबंध सतह पर आ गए। इसमें दो राय नहीं कि दोनों दलों के बीच कटुता का मूल कारण दलित वोट बैंक के जरिए अपना जनाधार बढ़ाना व मजबूत करना है। दोनों दलों को अपना जनाधार बढ़ाने का अधिकार है, लेकिन यदि ऐसा करते हुए राजनीतिक तौर-तरीकों और मूल्यों-मान्यताओं की अनदेखी की जाएगी तो इससे वैमनस्यता और अधिक बढ़ेगी। यह वैमनस्यता समाज पर भी दुष्प्रभाव डाल सकती है। इन स्थितियों में यह आवश्यक हो जाता है कि दोनों दल लोकतंत्र की मर्यादा को ध्यान में रखते हुए कार्य करे, क्योंकि इस पूरे प्रकरण ने भारतीय राजनीति के अशालीन चेहरे को उजागर किया है।
Reference:jagran.com