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राहुल गाँधी का ठगो जैसा भाषण

देश की राजनीति मे नई खबर हैं राहुल गाँधी को कांग्रेस पार्टी मे नंबर 2 पद मिलना… वो अलग बात  हैं के एसा कॉंग्रेसी नेता पहले ही दिल से स्वीकारे हुए थे लेकिन अब सार्वजनिक तौर पर एसा क्ने की कौशिश की गई हैं…राहुल गाँधी ने इसका बाद अपना पहला भाषण दिया…उसको सुनकर  मुझे लगा के जैसे कोई ठग भाषन ... Read More »

कैसे ले सूचना के अधिकार का फायदा

आरटीआई (राइट टु इन्फर्मेशन) यानी सूचना का अधिकार ने आम लोगों को मजबूत और जागरूक बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है। जम्मू-कश्मीर को छोड़कर यह कानून देश के सभी हिस्सों में लागू है। इस कानून के जरिए कैसे आप सरकारी महकमे से संबंधित अपने काम की जानकारी पा सकते हैं, बता रहे हैं सुदेश रंजन : Read More »

प्रमोशन में आरक्षण

अनुसूचित जाति-जनजाति के सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति के लिए आरक्षण संबंधी संविधान संशोधन विधेयक पर राज्यसभा की मुहर लग जाने के बाद ऐसा ही लोकसभा में होना तय सा दिख रहा है। अच्छा होता कि इस विधेयक पर बहस और वोटिंग के दौरान राज्यसभा हंगामे से बची रहती। दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हो सका। इस विधेयक का विरोध कर रही ... Read More »

क्योंकी हम भीम के बन्दे है

नहीं ज़ुकेंगे , नहीं सहेंगे, आगेही बढ़ते जायेंगे क्योंकी हम भीम के बन्दे है . नहीं सहेंगे जुल्मो को हम, अब नहीं सहेंगे अत्याचार क्योंकी हम भीम के बन्दे है . Read More »

अकेले व्यक्ति की शक्ति

मैं अकेला क्या कर सकता हूं? एक अरब बीस करोड़ की आबादी में मैं तो बस एक हूं। अगर मैं बदल भी जाता हूं, तो इससे क्या फर्क पड़ेगा? बाकी का क्या होगा? सबको कौन बदलेगा? पहले सबको बदलो, फिर मैं भी बदल जाऊंगा। ये विचार सबसे नकारात्मक विचारों में से हैं। इन सवालों का सबसे सटीक जवाब दशरथ माझी ... Read More »

नेहरू काल से कांग्रेस देश से गद्दारी कर रही है !

कांग्रेस का उदय देश मे शासन व्यवस्था भारत के शिक्षित वर्ग के अधिक प्रतिनिधित्व के लिये अंग्रेज़ों द्वारा हुआ था, शुरुआती दौर मे ए नही माना गया था की भारत के स्वतंत्रता संग्राम मे कांग्रेस कोई सकारात्मक भूमिका अदा करेगी, अपितु शिक्षित वर्ग को क्षद्म संतुष्टि प्रदान करना इसका उदेश्य था ताकि अंग्रेज़ों के शासन को अधिक मजबूत किया जाये ... Read More »

बाबा साहेब द्वारा महात्मा गांधी की टिप्पणियों का उत्तर

महात्मा जी ने मेरे जाति पांति तोड़क मंडल के लिए तैयार किये गये भाषण पर अपने पत्रा ÷हरिजन’ में टिप्पणी करके मेरा जो सम्मान किया है, उसके लिए मैं उनका अनुगृहीत हूं। महात्मा जी के द्वारा की गयी मेरे भाषण की आलोचना के पढ़ने से यह स्पष्ट हो जाता है कि वे मेरे जाति भेद पर प्रकट किये गये विचारों ... Read More »

दलितों का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्‍य

भारत में दलित आंदोलन की शुरूआत ज्योतिराव गोविंदराव फुले के नेतृत्व में हुई। ज्योतिबा जाति से माली थे और समाज के ऐसे तबके से संबध रखते थे जिन्हे उच्च जाति के समान अधिकार नहीं प्राप्त थे। इसके बावजूद ज्योतिबा फूले ने हमेशा ही तथाकथित ‘नीची’ जाति के लोगों के अधिकारों की पैरवी की। भारतीय समाज में ज्योतिबा का सबसे दलितों ... Read More »

आधुनिक भारत व दलित अधिकार

आज दलितों को भारत में जो भी अधिकार मिले हैं उसकी पृष्ठभूमि इसी शासन की देन थी। यूरोप में हुए पुर्नजागरण और ज्ञानोदय आंदोलनों के बाद मानवीय मूल्यों का महिमा मंडन हुआ। यही मानवीय मूल्य यूरोप की क्रांति के आर्दश बने। इन आर्दशों की जरिए ही यूरोप में एक ऐसे समाज की रचना की गई जिसमें मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता ... Read More »

आंबेडकर का सपना, दलित बनें धनवान

भारतीय संविधान के रचयिता डॉ. भीमराव आंबेडकर के कई सपने थे। भारत जाति-मुक्त हो, फूड सरप्लस हो, औद्योगिक राष्ट्र बने, पूरी तरह शहरी हो, सदैव लोकतांत्रिक बना रहे। ये सपने जगजाहिर हैं, पर उनका एक और सपना भी था कि दलित धनवान बनें। वे हमेशा नौकरी मांगने वाले ही न बने रहें, नौकरी देने वाले भी बनें। Read More »

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