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Category Archives: दलित

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Indian Dalit, Indian Poor people

दलित महिला की सफलता की कहानी |

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दलित महिला की सफलता की कहानी | एक अबला और असहाय दलित युवती के मजबूत और करोड़पति उद्यमी बनने की असली कहानी। कभी पति की शारीरिक प्रताड़ना से आजिज आकर इस युवती ने जिंदगी खत्म करने के लिए जहर पी डाला था। लेकिन किस्मत के साथ साथ हौंसले और मेहनत ने उसे नई जिंदगी के साथ साथ बेशुमार दौलत भी ... Read More »

दलितों पर अत्याचार और हरियाणा सरकार की गुंडागर्दी

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अच्छे दिन आने की उम्मीदों के बीच दिल्ली के जंतर-मंतर पर महीनों से अपनी इज्जत-आबरू, न्याय और अस्तित्व के लिए धरने पर बैठे कुछ लोग अपने सामने अंधेरे के सिवाय कुछ और नहीं देख पा रहे हैं। 23 मार्च 2014 को जब देश शहीद भगत सिंह की कुर्बानी को याद कर रहा था, हरियाणा के हिसार जिले के भगाणा गांव ... Read More »

बदला लो और बदल दो

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दो बहनो की गेंग रेप के बाद हत्या का मामला अभी चर्चा मे है की मुलायम के आजमगढ मे एक और 17 वर्षीय लड़की का गेंग रेप किया गया बह भी एक जाती विशेष के द्वारा| उधर हरियाणा के चार लड़कियॉ के साथ गेंग रेप की शिकार लड़कयो के परिवार बाले 2 महीने से दिल्ली मे जन्‍तर मन्‍तर पर इंसाफ ... Read More »

नरसंहार के 17 साल बाद कितने बदले हैं दलितों के हालात

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सुवा मेहता की अब काफी उम्र हो चली है लेकिन लगभग 17 साल पहले वो अपने गांव में हुए उस नरसंहार को बिल्कुल नहीं भूले हैं। जिसमें 58 दलितों का रात के अंधेरे में कत्ल कर दिया गया था। वो बिहार के अरवल जिले के लक्ष्मणपुर बाथे गांव में रहते हैं। वो कहते हैं, “मार काट के बाद पूरे गांव ... Read More »

कॉंग्रेसी सोच और दलित

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मा.कांशीरामजी जैसे अपने उद्देश को पूरा करने के लिए अगर कोई बहुत ज्यादा समर्पित हो तो क्या हो सकता है यह कल राहुल गांधी के बहनजी पर दिए गए बयान से साबित हो गया। मा.कांशीरामजी के समर्पित आचरण से किए गए कार्य के कारण उत्तर प्रदेश से काँग्रेस का सुपड़ा साफ हो गया और तभी से काँग्रेस कभी भी केंद्र ... Read More »

मीडिया में दलित आ भी जायें तो करेंगे क्या

मीडिया में दलितों की भागीदारी और उनके सरोकरों की क्या स्थिति है सब जानते हैं। किस तरह उन्हें आने नहीं दिया जाता या उनके लिए दरवाजे बंद कर दिये जाते हैं। फॉरवर्ड प्रेस के मई13 के अंक में ‘जातीय पैकेजिंग के टी.वी. चैनल’ में वरिष्ठ पत्रकार अनिल चमड़िया ने दलितों के मीडिया में आने और उनके प्रवेश पर अघोषित रोक ... Read More »

दलित मूवमेन्ट को कमजोर करते सामाजिक संगठन

आज हम दलित मूवमेन्ट पर विचार कर रहे है जिसके लिए बाबा साहेब ने अपना पूरा जीवन न्योछावर कर लिया, दलित मूवमेन्ट जिसका प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष प्रभाव हमारे जीवन में दिन-प्रतिदिन पड़ता है । यदि इसे अच्छी तरह समझना है तो हमें हमारी जाति आधारित व्यवस्था तथा आवरण से बाहर निकलना होगा, तभी हम इसे अच्छी तरह समझ पायेंगे । Read More »

यह नन्दी नही अक्ल की गंदगी है

जयपुर पुस्तक महोत्सव में लेखक और समाजशास्त्री आशीष नंदी ने फरमाया है कि सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार दलित वर्गों यानी अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ी जातियों के लोग करते हैं। आशीष नंदी अगर सिर्फ लेखक होते तो उन्हें नामवर सिंह की श्रेणी में रखकर उनपर तरस खाया जा सकता था, क्योंकि वे भी दलित-विरोधी मानसिकता के हैं। फर्क सिर्फ यही है ... Read More »

प्रमोशन में आरक्षण

अनुसूचित जाति-जनजाति के सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति के लिए आरक्षण संबंधी संविधान संशोधन विधेयक पर राज्यसभा की मुहर लग जाने के बाद ऐसा ही लोकसभा में होना तय सा दिख रहा है। अच्छा होता कि इस विधेयक पर बहस और वोटिंग के दौरान राज्यसभा हंगामे से बची रहती। दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हो सका। इस विधेयक का विरोध कर रही ... Read More »

दलितों का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्‍य

भारत में दलित आंदोलन की शुरूआत ज्योतिराव गोविंदराव फुले के नेतृत्व में हुई। ज्योतिबा जाति से माली थे और समाज के ऐसे तबके से संबध रखते थे जिन्हे उच्च जाति के समान अधिकार नहीं प्राप्त थे। इसके बावजूद ज्योतिबा फूले ने हमेशा ही तथाकथित ‘नीची’ जाति के लोगों के अधिकारों की पैरवी की। भारतीय समाज में ज्योतिबा का सबसे दलितों ... Read More »

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