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यह नन्दी नही अक्ल की गंदगी है

जयपुर पुस्तक महोत्सव में लेखक और समाजशास्त्री आशीष नंदी ने फरमाया है कि सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार दलित वर्गों यानी अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ी जातियों के लोग करते हैं। आशीष नंदी अगर सिर्फ लेखक होते तो उन्हें नामवर सिंह की श्रेणी में रखकर उनपर तरस खाया जा सकता था, क्योंकि वे भी दलित-विरोधी मानसिकता के हैं। फर्क सिर्फ यही है कि जहां नामवर सिंह को यह चिंता है कि दलितों को आरक्षण जारी रहा तो ब्राह्मण-ठाकुरों के लड़के भीख मांगेगे, वहीं आशीष नंदी दलितों को ही भ्रष्टाचार के लिए जिम्मेदार मानते हैं।

ये दोनों एक ही मानसिकता के हैं कि दलितों को भागीदारी अर्थात आरक्षण के तहत नौकरी न मिले। नौकरी मिली तो नामवर सिंह के मुताबिक़ ब्राह्मण-ठाकुरों के लड़के वि‍श्‍ववि‍द्यालयों में प्रोफेसर नहीं बन पाएंगे और नंदी के मुताबिक़ भ्रष्टाचार करेंगे। लेखक को लोकतान्त्रिक और प्रगतिशील होना चाहिए और ये दोनों ही लोकतान्त्रिक और प्रगतिशील नहीं हैं। ये लोकतंत्र से खिसियाये लोग हैं, इसलिए इनके लिए क्या रोना।

लेकिन आशीष नंदी को क्षमा नहीं किया जा सकता, क्योंकि वे समाजशास्त्री भी हैं। ऐसा कोई भी समाजशास्त्रीय अध्ययन, जो किसी अपराध के लिए जातिविशेष या धर्मविशेष को दोषी मानता हो, तथ्यात्मक और वैज्ञानिक अध्ययन नहीं हो सकता। ऐसा अध्ययन करने वाला किसी भी तरह से समाजशास्त्री नहीं हो सकता। और यदि वो है तो पागल है और उसे शिक्षण-कार्य से तुरंत रोक दिया जाना चाहिए। इन नीम-हकीम समाजशास्त्री को मालूम होना चाहिए कि ब्रिटिश सरकार ने कुछ घुमंतू जनजातियों को अपराधशील जातियों के रूप में नोटिफाइड किया था, जो गलत था, क्योंकि इसी आधार पर उन पर पुलिस अत्याचार करती थी।
बाद में भारत सरकार ने उसे निरस्त किया था, क्योंकि किसी भी जाति को अपराधी बताना या मानना असामाजिक और अलोकतांत्रिक कृत्य है। अंग्रेज तो चले गये, पर उनकी मानसिकता वाले आशीष नंदी जैसे लोग अभी भी जिंदा हैं। ऐसे लोगों का एक ही इलाज है कि उनके खिलाफ तुरंत क़ानूनी कार्यवाही हो, ताकि अलोकतांत्रिक सोच से समाज को बचाया जा सके। जहां तक भ्रष्टाचार का सवाल है, तो यह इतना आसान विषय नहीं है, जितना आशीष नंदी समझते हैं कि दलितों को शासन-प्रशासन से हटा दो तो भ्रष्टाचार ख़त्म हो जायेगा
देश में जाति को लेकर वि‍कट स्‍थि‍ति: काशीनाथ सिंह

डा.काशीनाथ सिंह ने कहा कि आशीष नंदी का बयान आपत्तिजनक है। ऐसा बयान देश हित के लिये नहीं होता। देश में जाति‍ को लेकर विकट स्थिति है, ऐसे में जातिगत बयानबाज़ी करना अनुचित हैं। बीएचयू के हिंदी विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर,  नाट्य आलोचक एवं साहित्यकार डा.वशिष्ठ नारायण त्रिपाठी ने कहा कि भ्रष्टाचार किसी जाति‍ और धर्म का नहीं है। किसी वर्ग विशेष में नहीं होता, बल्कि समझना चाहिये कि‍ ये तो मनुष्य की एक ख़राब प्रवृति‍ और सोच है। ऐसे बयान विद्वानों के बीच देना तर्क संगत नहीं है। लेखक और साहित्यकार होकर ऐसा बयान देना अनुचित है, बिल्कुल गलत है। बीएचयू संबद्ध डीएवी कालेज के पूर्व प्रोफेसर और वरिष्ठ साहित्यकार आलोचक डा.जितेन्द्र नाथ मिश्र  ने कहा कि‍ आशीष नंदी का बयान पागलपन को दर्शाता है। जिनका का  समाज के विकास से लेना-देना नहीं रहता, वो लोग ऐसा बयान देते हैं।
मंच का दुरुपयोग कि‍या नंदी ने: गोपाल दास नीरज
महाकवि व उत्‍तर प्रदेश हिंदी संस्थान के अध्‍यक्ष गोपालदास नीरज का कहना है कि आशीष नंदी ने विवादास्‍पद बात कर जयपुर साहित्‍य सम्‍मेलन के मंच का दुरुपयोग किया है। नंदी ने इतने बड़े मंच की गरिमा खराब की है। नीरज ने बताया कि ज्‍यादातर गलत काम पढ़े-लिखे लोग ही करते हैं, क्‍योंकि ऐसे लोग जानते हैं कि गड़बड़ी करके कैसे बचा जा सकता है। दलित ऐसा नहीं कर रहे हैं। वे गड़बड़ी करना जानते भी नहीं हैं। आशीष नंदी ने एक बड़े वर्ग को अपमानित करने वाली बात कही है। ऐसा नहीं कहना चाहिए था।
भ्रष्‍टाचारी जमात को बेनकाब करने का ऐति‍हासि‍क मौका: दुसाध हरि लाल

दलि‍त चिंतक दुसाध हरि लाल का कहना है कि हजारे-केजरीवाल ने मीडिया और बुद्धिजीवी वर्ग के साथ मिलकर भ्रष्टाचार जैसी गंभीर समस्या को हल्का बनाने का जो गुनाह किया था, आशीष नंदी के बयान ने उसकी भरपाई कर दी है। नंदी के बयान के बाद निश्चय ही भ्रष्टाचार के जाति-शास्त्र पर बहस शुरू होगी। इसी बहस के जरिये निकल सकता है भ्रष्‍टाचार के खात्मे का सूत्र। वैसे, मुझे एक मित्र ने सूचना दी है कि मिस्टर नंदी ने अपने बयान के लिए माफ़ी मांग ली है।

मुझे लगता है देश का बुद्धिजीवी वर्ग, जिसके विषय में आप जानते ही हैं कि‍ वह बाबासाहेब डा.आंबेडकर की भाषा में मुख्यतः ब्राह्मण वर्ग है, खुद आगे बढ़ कर नंदी की आलोचना करेगा ताकि बहुजनों का आक्रोश मर जाये और भ्रष्टाचार के जतिशास्त्र पर बहस आगे न बढ़े। किन्तु मित्रो, पुनः कहूंगा कि यदि आप भ्रष्टाचार को बड़ी समस्या मानते हैं और चाहते हैं भ्रष्टाचारी वर्ग बेनकाब हो तो प्लीज बहस को मरने न दीजियेगा। भ्रष्टाचारी जमात को बेपर्दा करने का इससे बेहतर मौका आपको इतिहास नहीं देगा। लिहाज़ा मेरा अनुरोध रहेगा कि नंदी की बात आई-गई होने से बचायें।

पिछड़ो के मूह बोले मशिहाओ की बोलती बंद: मनोज भरती

नन्दी ने एस टी और एस सी के लोगो को ही नही बल्कि पिछड़ो को भी भ्रस्ट बोला लेकिन बड़े ताज्जुब की बात है तमाम पिछड़ो के नेता तो अपने आप को पिछड़ो का मसीहा साबित करने के दौड़ मे लगे रहते है चाहे बह फिर मुलायम हो या लालू हो यह सब चुप लगा कर बैठ गये जैसे की पिछड़ो पर नन्दी की कही बात सच है|

आखिर नन्दी जैसे और तमाम समाज शास्त्री कभी समाज मे फैली जाती बड़ी गंदगी पर कभी बात क्यो नही करते क्यो नही लिखते की इस गंदगी की कैसे जल्दी से जल्दी सॉफ किया जाय|
कैसे बाबा साहब की कही बात को आयेज बड़ाया जाय की जबतक समाज मे रोटी और बेटी का रिस्ता कायम नही होता| समाज मे तमाम समस्याये बही रहेगी चाहे भी बह बलात्कार जैसे बड़ी समस्या ही क्यो ना हो

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