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आंबेडकर का सपना, दलित बनें धनवान

भारतीय संविधान के रचयिता डॉ. भीमराव आंबेडकर के कई सपने थे। भारत जाति-मुक्त हो, फूड सरप्लस हो, औद्योगिक राष्ट्र बने, पूरी तरह शहरी हो, सदैव लोकतांत्रिक बना रहे। ये सपने जगजाहिर हैं, पर उनका एक और सपना भी था कि दलित धनवान बनें। वे हमेशा नौकरी मांगने वाले ही न बने रहें, नौकरी देने वाले भी बनें।

बात 29 अक्टूबर 1942 की है जब डॉ. आंबेडकर ने तत्कालीन गवर्नर जनरल को दलित समस्याओं से संबंधित एक ज्ञापन सौंपा। डॉ. आंबेडकर गवर्नर जनरल की एग्जेक्यूटिव काउंसिल के सदस्य थे इसलिए यह ज्ञापन पूरी तरह गोपनीय था। डॉ. आंबेडकर के लेखों और भाषणों के संग्रह के दसवें खंड में इसे पृष्ठ संख्या 404-436 पर पढ़ा जा सकता है। उक्त मेमोरेंडम में एक सेक्शन है जिसमें सीपीडब्ल्यूडी में दिए जाने वाले ठेकों का जिक्र है। डॉ. आंबेडकर के अनुसार सीपीडब्ल्यूडी द्वारा दिए गए कुल 1171 ठेकों में मात्र एक ठेका दलित को मिला है। वे दलितों को और ठेके देने की व्यवस्था की मांग करते हैं और इस बात की ओर ध्यान खींचते हैं कि हिंदू, मुसलमान और सिख ठेकेदार प्रॉफिट बना रहे हैं जबकि दलित मजदूर उनके यहां नौकरी कर रहे हैं।
दलित पूंजीवाद

वर्ष 1942 में यानी आज से 68 वर्ष पूर्व डॉ. आंबेडकर सीपीडब्लयूडी के ठेकों में दलितों की भागेदारी की मांग कर रहे थे। तब शायद कुछ ही दलित इतने पैसे वाले रहे होंगे कि ठेकेदार बनने की स्थिति में पहुंच सकें। बावजूद इन सीमाओं के, डॉ. आंबेडकर का एक प्रबल सपना था कि दलितों में मोटा पैसा बनाने वाला एक तबका जरूर पैदा हो। दुर्भाग्यवश डॉ. आंबेडकर को मानने वाले दलित उनके इस सपने को ज्यादा तवज्जो न दे सके। गैर दलित समाज ने तो इस सपने को भूल जाने में ही समझदारी समझी। अलबत्ता सुखद बात यह है कि बगैर किसी आंदोलन, बगैर किसी बड़ी मुहिम और बगैर किसी सरकारी सहयोग के आंबेडकर के सपनों की एक नई दलित पीढ़ी तैयार हो रही है। इसे दलित पूंजीवाद की संज्ञा देना गलत नहीं होगा। इसकी झलक विगत दो सप्ताह पूर्व पुणे में देखने को मिली।

डिक्की यानी डीआईसीसीआई

पुणे के दलित उद्यमियों ने दलित इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री (डीआईसीसीआई) नामक एक ट्रेड बॉडी बना ली है। एक नौजवान दलित उद्यमी मिलिंद कांबले के नेतृत्व में डीआईसीसीआई ने जून 4-5-6, 2010 को पुणे में ही दलित एक्सपो 2010 यानी दलित ट्रेड फेयर 2010 आयोजित करने का फैसला कर लिया है। फिलहाल इस दलित ट्रेड फेयर की तैयारियां भी जोर शोर से चल रही हैं। डीआईसीसीआई ने पुणे के एक इंजिनियरिंग कॉलेज के स्टेडियम को बुक कर लिया है जिसमें 223 स्टॉल बनाए जा रहे हैं। यहां दलित उद्यमी अपने प्रॉडक्ट्स प्रदर्शित करेंगे। पूरे मैदान को टेंट से कवर कर लिया जाएगा तथा एक सौ एसी लगा कर मैदान को ठंडा रखा जाएगा। वीआईपी लाउंज बनेंगे, सेमिनार हॉल होंगे, फूड कोर्ट बनेगा और बिजनस डील के लिए अलग कमरे होंगे। इस आयोजन के लिए एक करोड़ से अधिक का बजट है। फिलहाल यह आयोजन महाराष्ट्र राज्य तक ही सीमित रहेगा। वर्ष 2015 में एक राष्ट्रीय स्तर का आयोजन दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित करने का लक्ष्य डीआईसीसीआई ने तय कर लिया है।

लेकिन क्या इतनी बड़ी संख्या में दलित उद्यमी महाराष्ट्र में उपलब्ध हैं? इन पंक्तियों के लेखक ने मिलिंद कांबले से जानना चाहा। उत्तर बड़ा सुखद रहा। अगले चार दिनों तक कांबले साहब मुझे दलित उद्यमियों से मिलाते रहे और उनके वर्कशॉप/ फैक्ट्रियां/ ऑफिस दिखाते रहे। स्वयं मिलिंद साहब की कंपनी फॉर्च्यून पुणे में कंस्ट्रक्शन की फील्ड में एक बड़ा नाम है जिसका करोड़ों का बिजनस है। 18 करोड़ प्रति वर्ष टर्न ओवर वाली नामदेव कृष्णा जी जगताप की कंपनी एवरेस्ट स्पन पाइप्स सीमेंट की सीवर पाइप बनाने वाली महाराष्ट्र की सबसे नामी कंपनी है।

12वीं पास राजेंद्र गायकवाड़ की जीटी पेस्ट कंट्रोल प्रा. लि. अब एक मल्टीनैशनल कंपनी बन चुकी है, जिसकी एक ब्रांच सिंगापुर में है। करोड़ों रुपए टर्न ओवर वाली मुकुंद कमलाकर की सोलर हीटर बनाने वाली सूर्याटेक कंपनी के ग्राहकों में क्रिकेटर जहीर खान भी शामिल हैं।

सातारा स्थित स्वप्निल धिंगार दिबे की चीनी मिल का वार्षिक कारोबार 60 करोड़ का है तो पुणे स्थित गोकुल गायकवाड़ टाटा मोटर्स के लिए ऑटो पार्ट्स बनाते हैं। एन. जे. करात की सिग्नेट इंजिनियर्स जर्मनी से बिजली का सामान इंपोर्ट कर भारत में बेचती है, तो आर. आर. कांबले की कंपनी ईजी केयर जर्मनी से ऑफसेट प्रिंटिंग मशीनें इम्पोर्ट करती है। करोड़ों रुपए के टर्न ओवर वाली अविनाश कांबले की पुणे स्थित युनाइटेड इंटरनैशनल ने मशहूर कूरियर कंपनी डीटीडीसी की 10 क्षेत्रों में फ्रैंचाइजी ले रखी है। डीआईसीसीआई ने दलित एक्सपो 2010 में 223 स्टॉल बनाने का फैसला किया है, लेकिन महाराष्ट्र में इससे ऐसे दलित उद्यमियों की संख्या कहीं बड़ी है, जिनका कारोबार करोड़ों का है। मुंबई स्थित कल्पना सरोज की कामायनी ट्यूब्स का सालाना कारोबार तो 300 करोड़ रुपए का आंकड़ा पार कर चुका है।

चाहिए थोड़ा अमेरिकन दिल

जाहिर है, गैर दलितों के मुकाबले दलित उद्यमी आज भी कहीं नहीं ठहरते। लेकिन अब सारे दलित मात्र राशन कार्ड या सरकारी नौकरियों पर ही निर्भर नहीं हैं। एक करोड़ से एक हजार करोड़ प्रति वर्ष के टर्न ओवर वाले दलितों का एक तबका पैदा हो चुका है। उनकी संख्या कम है, कारोबार का आकार भी अभी छोटा है, लेकिन दोनों ही मामलों में दलित उद्यमी इतने क्षमतावान तो हो ही गए हैं कि अब दलित ट्रेड फेयर लग सकता है।

काश, भारत की सरकार और भारत के बड़े पूंजीपतियों में थोड़ा सा अमेरिकन दिल लग जाए तो आने वाले दशक तक दलितों में भी अरबपतियों की एक छोटी फौज तैयार हो सकती है। बहरहाल, इतना संतोष तो है ही कि सरकारी क्षेत्र से इतर नौकरी देने वाला एक तबका दलितों के भीतर से ही पैदा हो रहा है और बाबा साहब आंबेडकर का एक बड़ा सपना पूरा हो रहा है। [चंद्रभान प्रसाद ]

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9 comments

  1. very good plz keep doing this then we will say india is really shining……………….sapna jaroor poora hoga.

  2. aapka artical padkar bahut achchha laga aub shuruat ho gayi hai to parinam bahut achchha hoga baba saheb ka yeh sapnna jaroor aur jaroor pura hoga.ek din dalits ka apna ek status hoga.

  3. S K Rawat Advocate

    please call me for any type of legal help

  4. Chandrabhan Prasad ji JAI BHIM ! JAI BHARAT !!

    Aap ke lekh ki kin sabdon mein tarif karun…mujhe sabd nahi mill rahe..me bhi ek DALIT udogi hoon jo Odisha ke paschimanchal balangir jilla ka Titilagarh sub-division mein hain…hum bhi apni samaj aur byabasaya ke lekar bahot sangharshrat hain…apke lekh aur DICCI ke sarahniya kamon se mure andar kuch apne aur samaj ke liye karpane ki khyamata panapne lagi hai…dhanyabaad

    Bijaya Meher – mob. 7504712558

  5. satish kumar sagar

    mera biodata ,
    name satish kumar sagar
    father name banwari lal
    add. 253 hajiapur bareilly up.
    education msc bed date of birth 20 11 1969
    bsp me join 1991 kai pado par par raha
    pun: jila star par kam karna chata hun

  6. I AM TOTATY SATISFI BSP IDIOLIOGY AND PROUD OF IT

  7. THIS IS A GOOD COMENT
    HUKAM SINGH BSR
    9410484489

  8. desh ke sabhi dalit udyogpatiyo kee soochee dene kee koshish kare. jay bheem.

  9. अगर आप बाबा साहेब आंबेडकर को google home page पे ६ िडसेंबर के िदन देखना चाहते हो तो कृपा करके ेgoogle को एक mail करे.
    .
    .
    SEND MAIL TO :-
    proposals@google.com
    .
    SUB:- Google Home page of Dr. Babasaheb Ambedkar
    on 6th Dec.
    .
    Dear /Sir/ Madam,
    Dr.Babasaheb Ambedkar is GREATEST
    INDIAN LEADER, PEACEFUL REVOLUTIONARY,
    HUMAN-RIGHT LEADER, FATHER OF THE BIGGEST INDIAN
    CONSTITUTION IN THE WORLD, ARCHITECT OF MODERN
    INDIA. 6 Dec. is his Death Anniversary. Please put his picture. on Google Home Page
    on Every 6th Dec.
    Thanks,
    .
    .

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