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तेरा आरक्षण, आरक्षण है  और मेरा आरक्षण, आरक्षण  नही

तेरा आरक्षण, आरक्षण है और मेरा आरक्षण, आरक्षण नही

आज कल कई लोग आरक्षण विरोध का खोखला ढिंडोरा पीट रहे है| जब मैने इनमे से कुझ लोगो ने जानना चाहा की क्या बह गाँधी विरोधी है तो आसमान ताकने लगे | क्यो की आरक्षण तो गाँधी की एक चाल थी जो बाबा साहब ने भारी दबाब मे आकर बनाई थी | जब बाबा साहब ने दलितों के लिया अलग से निर्वाचन की मांग रखी तो गाँधी भूख हड़ताल पर बैठ गया| तब बाबा साहब ने यह प्रस्ताव गाँधी के सामने रखा | तो सबसे पहले इन आरक्षण बिरोधिओ को गाँधी से नफरत  करनी चाहिये |
मेरा दूसरा सवाल था | तुमने कभी ट्रेन का टिकेट बुक कराया , सभी ने एक सुर मे कहा हा तो मैने कहा अभी तो तुम कह रहे थे की तुम आरक्षण विरोधी हो फिर भी आरक्षण करा लिया उनका तर्क था ट्रेन मे तो ऐसा ही होता है| मैने कहा क्यो | अगर बहा भी आरक्षण की खत्म कर दो तो कितना अच्छा होगा पहले आओ पहले पाओ और पैसा भी कम |
मेरा यह तर्क इसलिये था क्यो की अगर सच मे ट्रेन मे आरक्षण खत्म कर दिया जाये और पहले आओ पहले पाओ के तर्ज पर सीट मिले तो सोचो क्या होगा | यह तथा कथित अमीर जो जायदतर आरक्षण के विरोधी है कभी भी गरीब दलित से पहले स्टेशन पर नही पहुच सकते | तो सीट क्या खाक मिलेगी | दोस्तो खेत मे मजदूरी करने बाला मजदूर हमेशा मलिक से पहले पहुच जाता है
मेरा यह तर्क सुनकर आब तक मुझे सारे ही पागल करार से चुके थे | मेरा अगला तर्के था की सिर्फ आरक्षण विरोधी हो जाती प्रथा के विरोधी नही हो | जो लोग अपने नाम के साथ जाती का टैग लगा के घूमते है उनके विरोधी क्यो नही | सिर्फ जाती के नाम पर पण्डित को मंदिर का पुजारी बना दिया जाता है देश मे कितने लाखो मंदिर है सब मे एक जाती विशेष को आरक्षण | उसके विरोधी हो की नही | मेरा यह तर्क भी उनको नही भाया
आब मेरा अगला तर्क था | कि आप आपने बच्चो का दाखिला अच्छे स्कूल मे कराया की नही | लगभग सबने एक सुर मे कहा हा, और बड़े गर्व से बताने लगे कि हमने तो इतना पैसा डोनेशन मे दिया | बस यही में सुनना चाहता था| मैने तुरंत कहा तो यह डोनेशन भी एक तरह् का आरक्षण है | आपने एक गरीब बच्चे का हक मारा है| पैसे के बल पर आपने आरक्षण लिया है इसका भी विरोध करोगे | अब सब शांत हो चुके थे |
मैने कहा आप अपने बच्चे का दाखिला स्कूल मे कराने के लिये सिफारिश कराते हो, डोनेशन देते हो नौकरी मे भी सिफारिश कराते हो मोटा पैसा देते हो ताकि नौकरी मिल जाये | मॅनेज्मेंट कोटे का लाभ उठाते हो | फिर भी कहते हो की आरक्षण के विरोधी हो| पहले आरक्षण का मतलब समझो फिर सभी तरह् के आरक्षण का लाभ लेना छोडो फिर गाँधी का विरोध करो अंत मे आरक्षण का विरोध करो | हम भी आपके साथ होगे|
सबसे अच्छा सारी बातो को छोड़ दो अगर समाज में रोटी और बेटी का रिश्ता कायम करो आरक्षण का विरोध अपने आप करना बंद करो दोगे| तब यह बाला आरक्षण आपको भी मिलने लगेगा सोचो आपकी बेटी की शादी किसी दलित से होगी तो उसके बच्चो को इसका लाभ मिलेगा | आपके बेटे की शादी किसी दलित लड़की से होगी तो उसके बच्चो को भी आरक्षण का लाभ मिलने लगेगा| तब आरक्षण के मायने ही खत्म हो जायेगे
दोस्तो इन सब तर्क के बाद मेरा मूह बंद करने का आखिरी रास्ता ही उनके सामने था बह था अरे चुप जा …(मेरी जाती).. कही का बड़ा आया लेक्चर देने उसके बाद एक गाली
लेखक : मनोज कुमार भारती

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