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प्रमोशन में आरक्षण

अनुसूचित जाति-जनजाति के सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति के लिए आरक्षण संबंधी संविधान संशोधन विधेयक पर राज्यसभा की मुहर लग जाने के बाद ऐसा ही लोकसभा में होना तय सा दिख रहा है। अच्छा होता कि इस विधेयक पर बहस और वोटिंग के दौरान राज्यसभा हंगामे से बची रहती। दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हो सका। इस विधेयक का विरोध कर रही समाजवादी पार्टी ने लोकसभा में भी हंगामा किया और राज्यसभा में भी।

बावजूद इसके इस पर संतोष किया जा सकता है कि उसने बहिष्कार का रास्ता चुनने के बजाय वोटिंग में भाग लिया। राज्यसभा में इस विधेयक पर वोटिंग के दौरान जिस तरह एक दर्जन वोट भी खिलाफ नहीं पड़े उससे यह स्पष्ट है कि ज्यादातर राजनीतिक दल अनुसूचित जाति-जनजाति के सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति के लिए आरक्षण की व्यवस्था के पक्ष में हैं। हालांकि इसके पीछे वोट बैंक की राजनीति भी हो सकती है। मौजूदा परिस्थितियों में कोई भी राजनीतिक दल इस डर से किसी भी आरक्षण व्यवस्था का विरोध करने के लिए आगे नहीं आता कि कहीं इससे उसके वोट बैंक पर विपरीत असर न पड़े।

कोई भी समझ सकता है कि सपा इस विधेयक के विरोध में इसलिए खड़ी हुई, क्योंकि अनुसूचित जातियों-जनजातियों को वह अपने वोट बैंक के रूप में नहीं देखती। हालांकि अनुसूचित जातियों-जनजातियों के सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति के लिए आरक्षण की जो व्यवस्था संविधान में संशोधन के जरिये बनाई जा रही है वह उच्चतम न्यायालय के फैसले के खिलाफ है, लेकिन यह उम्मीद की जाती है कि इस विधेयक में उन आपत्तियों का निराकरण किया गया होगा जिनके आधार पर मायावती सरकार द्वारा बनाई गई आरक्षण व्यवस्था खारिज की गई थी। इन आपत्तियों का निस्तारण इसलिए भी आवश्यक है, क्योंकि ऐसा न होने पर भावी व्यवस्था को एक बार फिर न्यायपालिका के समक्ष चुनौती दी जा सकती है।

इस व्यवस्था में यह भी देखा जाना आवश्यक है कि अन्य वर्गो के अधिकारों की अनावश्यक कटौती न हो। एक ओर जहां यह आवश्यक है कि अनुसूचित जातियों और जनजातियों को यथोचित पदोन्नति का लाभ मिले वहीं यह भी जरूरी है कि सुधार इस ढंग से न हो कि एक अति का स्थान दूसरी अति ले ले। अनुसूचित जातियों-जनजातियों के सरकारी कर्मचारियों के आरक्षण के लिए संविधान संशोधन की आवश्यकता इसलिए पड़ी, क्योंकि इन वर्गो के कर्मियों को बमुश्किल पदोन्नति मिल पा रही थी। इस विधेयक के विरोधी चाहे जैसे तर्क क्यों न दें, इससे इन्कार नहीं किया जा सकता कि वंचित वर्गो के साथ अभी भी भेदभाव होता है और कई बार इन वर्गो के पात्र कर्मचारियों को पदोन्नति से दूर रखा जाता है।

बदली हुई व्यवस्था में यह भी उचित नहीं होगा कि अन्य वर्गो के कर्मचारी पदोन्नति के लिए तरस जाएं। ऐसी किसी स्थिति से तभी बचा जा सकता है जब पदोन्नति में किसी न किसी स्तर पर कुशलता व दक्षता को विशेष महत्व दिया जाए। यदि पदोन्नति में योग्यता और दक्षता को आधार नहीं बनाया गया तो इसका दुष्प्रभाव प्रशासन पर पड़ सकता है। नि:संदेह वंचित वर्गो को पदोन्नति का लाभ देने की जरूरत है, लेकिन इसके नाम पर यह भी नहीं होना चाहिए कि एक नई भेदभावपूर्ण व्यवस्था लागू कर दी जाए। [Jagran]

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5 comments

  1. Promotion Reservation me support karne wali sabhi party ko hardik thanks. — jai bhim

  2. lakh lkha hardik shubhkamnaye bahan shr su. shri, mayavatijiji ko, jinhone pure deski dalit samaj ke liye sarakar ko hila diya aur hame ye aarakshan ka tohfa diya.. fir se bahanji ko dilki harduk shubhkamnaye…

  3. Bsp is good work in india

  4. bahan su. shri, mayavati ji Reservation me support karne ke liye bhut dhnyawad(thanx).dalit hito ke bare me sochne wali ek mtra party h BSP….

  5. mayawati ji aap sangarsh karo hum aapke saath hai.bjp&congress
    manuwadi party hai yeh log nahi chhahte ki dalit warg inse aage jaye aur promotion in reservation ko support nahi kar rahe hai en logo ki mansikta isi baat se dikhati hai yeh log dalit warg ko ek adhikari ke roop me sweekar nahi karte hai bus enke naukar bankar kam karo yah yahi chahte hai. hum sab aapke sath hai. jai bhim jai mayawati…………………thanks

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